Monday, February 9, 2009

संगम से यमुना पुल तक नौका-विहार

 

माघ की पूर्णिमा का स्नान सम्पन्न होने के बाद प्रयाग का माघ मेला अपने अवसान पर पहुँच गया है। कल्पवासी भी संगम क्षेत्र का प्रवास पूरा करके अपने घर की राह पकड़ रहे हैं। साइबेरिया से आने वाले प्रवासी पक्षी भी ठंडक समाप्त होने के बाद अपने देश को लौटने वाले हैं।

वसन्त का आगमन हो ही चुका है। इस सुहाने मौसम में संगम क्षेत्र की छटा निराली हो जाती है। हल्की गुनगुनी धूप में खुली नाव में बैठकर यमुना के गहरे हरे पानी पर अठखेलियाँ करते प्रवासी पक्षियों के बीच सैर करना अद्‌भुत आनन्द देने वाला है। गत दिनों सपरिवार इस सुख का लाभ उठाने का अवसर मिला।

आप जानते ही हैं कि इलाहाबाद में यमुना नदी गंगा जी में मिलकर परम पवित्र संगम बनाती है। संगम पर मिलने से ठीक पहले यमुना पर जो आखिरी पुल बना है वह अभी बिलकुल नया (सन्‌ २००४ ई.) है तथा आधुनिक अभियान्त्रिकी का सुन्दर नमूना भी है। दो विशालकाय खम्भों से बँधे तारों ले लटकता हुआ (Cable-stayed bridge) यह ६१० मीटर लम्बा पुल संगम क्षेत्र में आने वाले लोगों के लिए एक अतिरिक्त आकर्षण का केन्द्र बन गया है।

Structure: Allahabad Yamuna River Bridge
Location: Allahabad, Uttar Pradesh, India
Structural Type:
 

Cable-stayed bridge
H-pylon, semi-fan arrangement

Function / usage:
 

Road bridge

eight-lane highway
Next to: Allahabad Yamuna River Bridge (1911)
main span 260 metre
total length 610 metre
girder depth 1.4 metre
deck width 26 metre
deck slab thickness 250 millimetre

मोटर चालित नौका पर बैठकर जब हम संगम से यमुना जी की ओर धारा की विपरीत दिशा में इस पुल की दिशा में बढ़े तो मेरे मोबाइल का कैमरा आदतन सक्रिय हो उठा:

पुल ११ नाव पर से नया पुल ऐसा दिखता है- पीछे पुराना पुल
पुल १४ किनारे के बाँध से दिखती पुल के नीचे जाती नाव
पुल ९ पुल के नीचे से लिए गये चित्र में इन्द्रधनुष ...?
पुल १ एक दूसरी नाव से क्रॉसिंग भी हुई
 पुल ५यहाँ यमुना की गहराई की थाह नहीं है
पुल २ किला-घाट : बड़े हनुमान जी पास में ही लेटे हुए हैं
पुल ८अकबर का किला यमुना जी को छूता हुआ खड़ा है 
पुल ४ यमुना जी की सतह पर कलरव करते विदेशी मेहमान
पुल १३ यमुना तट पर वोटक्लब जहाँ ‘त्रिवेणी-महोत्सव’ होगा 
पुल ७पुराना यमुना पुल (निर्माण सन्‌ १९११ई.)

नाव से हम संगम के निकट बने घाट पर उतरे। यमुना का गहरा हरा और साफ पानी गंगाजी के मटमैले किन्तु ‘पवित्र’ जल से मिलता हुआ एक अद्‌भुत कण्ट्रॉस्ट बना रहा था।

पुल ६

बदलता रंग:  संगम पर गंगाजी से मिलती हुई यमुनाजी

कुछ तस्वीरें बाल-गोपाल की इच्छा पर यहाँ देना जरूरी है:

Image051 सारथी पुल १० दादी और बाबा जी
Image063 माँ-बेटा पुल १७
अभी क्यों उतार दिया नाव से?

अनावश्यक सूचना:)

अगले सप्ताह से (१५ से २१ फरवरी तक) त्रिवेणी महोत्सव शुरू हो रहा है। लगातार सात शामें यमुना तट पर गुजरेंगी। उस दौरान अपनी ब्लॉगरी को विराम लगना तय है।:)smile_cry

(सिद्धार्थ)

13 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा जानकारी/ बेहतरीन चित्र.

प्रवासी पक्षी भी ठंडक समाप्त होने के बाद अपने देश को लौटने वाले हैं जी, कनाडा से आये वाले भी इसी तैयारी में हैं अब.


आगे त्रिवेणी महोत्सव की रपट का इन्तजार रहेगा.

अजित वडनेरकर said...

हमेशा की तरह सजीली पोस्ट। शानदार चित्र। परिजनों से भी मिल लिए हम।
पुल के सभी कोणों से चित्र देखे। इलाहाबाद का किला घाट मेरे लिए नया अनुभव रहा। इसके न तो पहले कभी चित्र देखे, न ही जिक्र सुना।
शुक्रिया...

mamta said...

इलाहाबाद का नाम सुनकर ही मन मे एक खुशी उमड़ पड़ती है और उस पर इतनी बढ़िया फोटो देखकर मन अति प्रसन्न हो गया ।

हम जब भी इलाहाबाद जाते है तो एक चक्कर यहाँ पर जरुर काटते है ।

संगीता पुरी said...

सुंदर पोस्‍ट....सुंदर चित्र....सुंदर परिवार.....सब कुछ अच्‍छा लगा।

seema gupta said...

"नौका-विहार सपरिवार बेहद रोमाचक रही.....यमुना अपने पुरे वेग पर लगती है....चित्र तो इतने सजीव हैं की की यमुना की लहरें जैसे सामने से ही गुजर रही हैं...."

Regards

अभिषेक ओझा said...

आनंद आ गया !

Arvind Mishra said...

याद हो आयीं पुरानी स्मृतियाँ ! नयनाभिराम ! शुक्रिया !

डॉ .अनुराग said...

सभी फोटो मस्त है......सन स्क्रीन लगाना मत भूलना

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर चित्र, एक बात समझ मै नही आती इतना पानी है हमारी नदियो मे , फ़िर भी भारत मे पानी की कमी?क्या कोई सिस्टम नही बन सकता कि इन नदियो का पानी हम सब के काम आये??
गंगा मैया को हमारा प्रणाम कहे.
धन्यवाद

अनूप शुक्ल said...

सुन्दर। मेले की रिपोर्टिंग बाद में करें।

ज्ञानदत्त । GD Pandey said...

पानी की ड्रॉपलेट्स से बनते इन्द्रधनुष बहुत मोहक और तिलस्मी लगते हैं। आपके चित्र बहुत सुन्दर हैं। धन्यवाद।

कुश said...

हम भी यही कह रहे है... अभी क्यों उतार दिया नाव से?

विराम लेकर जल्दी लौटिए..

कविता वाचक्नवी said...

माँ-बेटा मोहक हैं। मोह लिया।