Satyarthmitra
हमारी कोशिश है एक ऐसी दुनिया में रचने बसने की जहाँ सत्य सबका साझा हो; और सभी इसकी अभिव्यक्ति में मित्रवत होकर सकारात्मक संसार की रचना करें।
डॉ. अरविन्द मिश्रा ने आज हमारी जोड़ी की तस्वीर तलाश किया जो थी ही नहीं। नहीं मिली तो किसी जोड़ा-जामा टाइप फोटू की फरमाइश भी कर दिए। हम ठहरे तकनीक से पैदल, सो शादी वाली फोटू यहाँ चेंप न सके। लेकिन एकदम ताजी फोटू भतीजे से खिंचवा ली है। आप भी देखिए :)
चुनावी ड्यूटी से फारिग़ होने के बाद अगले दिन कार्यालय में काम कुछ हल्का ही था। एक सीनियर अफ़सर मेरे कमरे में आये तो मैंने उनका खड़ा होकर स्वागत किया। मेरे अन्दाज में कुछ अतिरिक्त गर्मजोशी अनायास ही आ गयी थी क्यों कि वे शायराना तबीयत के मालिक हैं। ग़ज़लें और नज्में लिखते हैं। ‘क्लीन शेव’ मुसलमान हैं। उनकी बातों से दकियानूसी या कट्टर ख़्याल की बू कभी नहीं आयी थी। अच्छी तालीम हासिल किए होंगे तभी अधिकारी बने हैं। मेरे मन में उनके प्रति यही भाव बने हुए थे।
मैने उनसे उर्दू अदब और ग़ज़लकारी की कुछ चर्चा की। उन्होंने बताया कि उनकी चार-पाँच किताबें उर्दू एकेडेमी से छप चुकी हैं। फै़ज़ अहमद फैज़ ने उनकी पीठ ठोकी है। फिराक़ साहब ने भी प्रशंसा में सिर हिलाया है...। मैने शिकायत की कि आपने हिन्दी (देवनागरी) में प्रकाशन क्यों नहीं कराया तो बोले प्रकाशक नहीं मिला। मैंने अफ़सोस जताया।
मैने उनसे ग़ज़ल, नज़्म और रुबाई आदि के बारे में कुछ जानना चाहा। अनाड़ी जो ठहरा। वे कुछ उदाहरण देकर मुझे समझा रहे थे। मेरे जैसा चेला पाकर वे उत्साहित भी लग रहे थे। तभी एक गजब हो गया...
उन्होंने कहा कि ये चार लाइनें सुनो...। यह गवर्नमेण्ट की पॉलिसी के खिलाफ़ है इसलिए मैने इसे कहीं साया (प्रकाशित) नहीं कराया है। लेकिन यह एक वजनदार बात है। उम्मीद है तुम्हें पसन्द आएगी।
उनकी ये चार लाइनें सुनने के बाद मैने सिर पकड़ लिया। मन में बेचैनी होने लगी कि नाहक इन्हें उस्ताद बनाने को सोच रहा था। कोफ़्त इतनी बढ़ गयी कि वार्ता बन्द करके उठ गया... इतना निकल ही गया कि सर! यह तो पब्लिक पॉलिसी और नेशनल पॉलिसी के भी खिलाफ़ है...।
अच्छा हुआ ये कहीं प्रकाशित नहीं हुआ। लेकिन उनके मन की खिड़की में झाँककर जो देख लिया उससे आपको परिचित जरूर कराना चाहूंगा। पता नहीं यह नैतिक है या नहीं लेकिन जिस सोच से मैं परिचित हुआ वो चिन्तित करने वाली जरूर है...
उन्होंने फ़रमाया...
तामीरे तनो-जान न रोको लोगों
ये नस्ले परीशान न रोको लोगों
शायद कोई इन्सान निकल ही आये
पैदाइशे इन्सान न रोको लोगों
(तामीरे तनो जान= शरीर और प्राण का निर्माण)
अचानक हुए इस मानसिक आघात् से मैं हतप्रभ होकर अपने बॉस के कमरे में चला गया। वो बहुत व्यस्त थे। अपनी पीड़ा बताने के अवसर की प्रतीक्षा में मैने सामने पड़े कागज के टुकड़े पर ये चार लाइनें भी लिख डाली...
हो रहा मुल्ला परेशान न रोको लोगों
देश बन जाये पाकिस्तान न रोको लोगों
दिवाला निकले देश का कि मुसीबत आये
निकल जो आये तालिबान न रोको लोगों
आप इस बारे में क्या सोचते हैं? क्या यह हकीकत चोट पहुँचाने वाली नहीं है? आप इसमें कुछ जोड़ना चाहेंगे क्या?
चुनावी ड्यूटी के रूप में आजकल कोषागार के सभी अधिकारी प्रत्याशियों के चुनावी खर्चे का हिसाब लेने में व्यस्त हैं। व्यय रजिस्टर का सूक्ष्म परीक्षण करने के लिए निर्वाचन आयोग ने कड़े दिशा निर्देश जारी कर रखे हैं। बुधवार को मैं भी इसी कार्य में व्यस्त था। तभी मेरे बॉस का बुलावा आ गया। मैं उनके कार्यालय कक्ष में दाखिल हुआ तो वहाँ का नजारा देखकर दंग रह गया।
एक पढ़ी लिखी सम्भ्रान्त सी दिखने वाली युवती अपने हाथ में कागजों का पुलिन्दा लिए बदहवास सी रोए जा रही थी। गोरे चिट्टे स्निग्ध चेहरे का रंग सुर्ख लाल हो गया था और आँखों से अश्रु धारा बहती जा रही थी। लगातार बोलते रहने से आवाज बैठ गयी थी। क्रोध और असहायता का मिश्रित भाव समेटे उसकी आँखों में भी लाल डोरे उभर आए थे। भर्राती आवाज गला सूखने का संकेत दे रही थी। वहा बैठे दूसरे लोग इस मोहतरमा को चुप कराने की सूरत नहीं निकाल पा रहे थे। एक तूफान सा उमड़ पड़ा था जो थमने का नाम नहीं ले रहा था।
कुछ क्षण के लिए मैं भी विस्मय से निहारता रहा। फिर मैने महिला गार्ड से ठण्डा पानी लाने को कहा और उन्हें शान्त होकर अपनी बात नये सिरे से धीरे-धीरे कहने का अनुरोध करने लगा। वो अकस्मात् फिर से शुरू हो गयीं तब मैने उनकी बात सुनने से पहले ठण्डा पानी पीने और आँसू पोंछकर बिलकुल नॉर्मल हो जाने की शर्त रख दी।
जब आँधी और बूँदा बाँदी थम गयी तब मुझे पता चला कि ये एक निर्दल प्रत्याशी हैं जो इलाहाबाद से सांसद बनकर देश की सेवा करने का सपना पूरा करना चाहती हैं। एक सपना जो इन्होंने अपने बचपन में ही देखा था और जिसे पूरा करने के लिए अन्य बातों के अलावा अविवाहित रहने का फैसला भी कर लिया था।
फिलहाल जिस समस्या से ये हलकान हुई जा रही थीं वो ये थी कि इनके द्वारा प्रस्तुत खर्च का व्यौरा जाँच अधिकारी ने अस्वीकृत कर दिया था। इस बात का आसन्न खतरा मडराता देखकर इनके होश उड़ गये थे कि शायद इनकी उम्मीदवारी खतरे में न पड़ जाय।
सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर चुकी कु. शशि पांडेय करीब डेढ़ साल पहले अपने पुराने शहर वापस आयी जहाँ २३ वर्ष पहले इलाहाबाद विश्वविद्यालय से इन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की थी। भारत की संसद में लोकसभा के लिए चुने जाने का सपना इनके दिल और दिमाग पर इस कदर छाया हुआ है कि बड़ी से बड़ी बाधा की चट्टान इनके फौलादी इरादों को रोक नहीं सकती।
सम्पन्न माँ बाप की इकलौती दुलारी बेटी ने अपने लिए जो रास्ता चुना है उसपर चलते हुए इन्होंने दिल्ली की पॉश कॉलोनी की आभिजात्य जीवन शैली का त्याग कर इलाहाबाद की मेजा, माण्डा, करछना तहसीलों के धूल भरे दुर्गम और अन्जान रास्तों पर निकल कर देहात में पसरी बदहाल गरीबी, भुखमरी और लाचारी के बीच उम्मीद की किरण फैलाने का फैसला किया है। कॉन्वेन्ट शिक्षा की विशुद्ध अंग्रेजी जुबान छोड़कर ग्रामीण परिवेश की स्थानीय अवधी/भोजपुरी बोली में संवाद कायम करने की चेष्टा बार-बार मुखरित हो जाती है।
Name: Km. Shashi Pandey
D/O: shri Vishwanath Pandey
Date of Birth: 13 June, 1963
Marital Status: Unmarried
Residence: Pitam Nagar, Allahabad
Education & Qualifications:
Graduation: BA with Eng.Literature, History, Political Science-1984 (University of Allahabad)
Post Graduation: MA in Political Science-1986 (AU).
LT : KP Training College, Allahabad-1988.
EDP: Entrepreneur Development Programme- FICC Tanasen Marg- 1994
LLB: Delhi University- Law Centre-2nd.(2001)
Diploma in Human Rights Law (2002): Indian Law Institute(Deemed University)
Family Background: Armed Forces Officers’ Family.
-Represented Delhi University in March 2000 for 1st PN Bhagawati Moot Court Competion in Benglore, Adjudged- “runner up”.
-Member: “Hum Aapke” - a registered NGO for Legal assistance to those who work in public interest. PIL on Ajmer Shariff to root out corruption rampant in Dargah Shariff, Ajmer.
“ I fought for the cause and rights of poor, indigent and sick which was deer to Khwaja Sahib”
“Pain of masses is my own pain. It pains me to watch them without water, electricity, sanitation, cleanliness, road and other basic amenities of life.”
किसी पार्टी का समर्थन प्राप्त किए बिना, समर्पित कार्यकर्ताओं की टीम गठित किए बिना, और चुनावी अभियान की विस्तृत रूपरेखा तैयार किए बिना ही संसद की मंजिल तक पहुँचने की राह दुश्वार नहीं लगती? इस प्रश्न का उत्तर कु.शशि बड़े आत्मविश्वास से देती हैं। अपने पहले प्रयास में मेरी कोशिश है कि मैं ग्रामीण जनता से व्यक्तिगत रूप से मिलूँ और उन्हें विश्वास दिलाऊँ कि राजनीति में स्वच्छ और ईमानदार छवि के लोग भी आगे कदम बढ़ाने को इच्छुक हैं। गाँव के बड़े-बुजुर्गों और महिलाओं ने जिस हर्षित भाव से मेरे सिर पर हाथ रखा है उसे देखकर मुझे बहुत खुशी मिल रही है।
गाँव-गाँव में घूमकर लोगों से अपने लिए वोट जुटाने में लगी शशि को रास्ता बताने वाले भी क्षेत्र से ही खोजने पड़ते हैं। अपनी सुरक्षा के लिए भी इन्होंने जिलाधिकारी से गनर नहीं मांगे। एक मात्र ड्राइवर के साथ सुबह का ‘ब्रन्च’ लेकर जब ये अपनी निजी इण्डिका में निकलती हैं तो पता नहीं होता कि आज किससे मिलना है। जिधर ही दस-बीस लोग दिख जाते हैं वहीं गाड़ी से उतरकर अपना परिचय देती हैं , अपनी योजनाओं को समझाती हैं, आशीर्वाद मांगती हैं, और वहीं से कोई आदमी गाड़ी में बैठकर अगले पड़ाव तक पहुँचा देता है। रात ढल जाने पर किसी देहाती बाजार, छोटे कस्बे या तहसील मुख्यालय में ही धूल, मिट्टी, मच्छर और गर्मी के बीच बिना बिजली के रात बिताने के चिह्न आसानी से चेहरे पर देखे जा सकते हैं। प्रत्येक तीसरे दिन चुनावी खर्चे का एकाउण्ट दिखाना अनिवार्य है इसलिए शहर आकर समय खराब करना पड़ता है।
इतने मजबूत और नेक इरादों वाली लड़की यदि छोटी सी बात पर रोती हुई पायी जाती है तो इसका क्या अर्थ क्या समझा जाय? एक नेता यदि इतना अधीर हो जाएगा तो कठिन परिस्थियों में कैसे नेतृत्व देगा? इस सवाल पर शशि झेंप जाती है लेकिन झटसे सच्चाई का खुलासा करती है। दरअसल मुझे लगा कि मेरी एक चूक से मेरा सारा सपना यहीं चकनाचूर हुआ जा रहा है। मैं नियम कानून का अक्षरशः पालन करने में विश्वास करती हूँ। कोई गलत काम करने के बारे में सोच भी नहीं सकती। कानून का पेशा है मेरा। फिर भी यदि एक कानूनी चूक से मुझे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता है तो यह मेरे लिए सबसे बुरा होगा। इसी घबराहट में मेरा धैर्य जवाब दे गया था।
शशि से लम्बी बात-चीत मैने अपने मोबाइल कैमरे से रिकॉर्ड की है। इसे दो-तीन बार सुन चुका हूँ। सुनने के बाद मेरा मन बार-बार यही पूछ रहा है कि इस युग में क्या ईमानदारी भी मनुष्य को कमजोर बना देती है?
आजकल चुनावी सरगर्मी में कोई दूसरा विषय अपनी ओर ध्यान नहीं खींच पा रहा है। दिनभर दफ़्तर से लेकर घर तक और अखबार-टीवी से लेकर इण्टरनेट तक बस चुनावी तमाशे की ही चर्चा है। सरकारी महकमें तो बुरी तरह चुनावगामी हो गये हैं।
ऐसे में मेरा मन भी चुनावी कविता में हाथ आजमाने का लोभ संवरण नहीं कर सका। तो लीजिए पेश हैं:
चुनावी कुण्डलियाँ
वामपन्थ की रार से अलग पड़ गया ‘हाथ’। सत्ता की खिचड़ी पकी, अमर मुलायम साथ॥
अमर मुलायम साथ चले कुछ मास निभाए। बजा चुनावी बिगुल, छिटक कर बाहर आए॥
यू.पी. और बिहार में, नहीं ‘हाथ’ का काम। तीन-चार मोर्चे बने, ढुल-मुल दक्षिण-वाम॥
अडवाणी की मांग पर, मनमोहन हैं मौन। सत्ताधारी पीठ का, असली नेता कौन॥
असली नेता कौन समझ में अभी न आया। अडवानी, पसवान, मुलायम, लालू, माया॥
लोकतंत्र का मन्त्र, जप रही बर्बर वाणी। ‘पी.एम. इन वेटिंग’ ही बन बैठे अडवाणी॥
नेता पहुँचे क्षेत्र में, भाग-भाग हलकान। वोटर से विनती करें, हमें चुने श्रीमान्॥
हमें चुनें श्रीमान्, करूँ वोटर की पूजा। मैं बस एक महान, नहीं है काबिल दूजा॥
मचा चुनावी शोर, घोर घबराहट देता। पाँच वर्ष के बाद लौटकर आया नेता॥
आप चुनाव का भरपूर आनन्द लीजिए। लेकिन एक विनती है कि मतदान के दिन धूप, गर्मी, और शारीरिक कष्ट की परवाह किए बिना अपना वोट ई.वी.एम. मशीन में लॉक कराने जरूर जाइए। यदि हम इस महत्व पूर्ण अवसर पर अपने मताधिकार का सकारात्मक प्रयोग नहीं करते हैं तो राजनीतिक बहसों में हिस्सा लेने का हमें कोई हक नहीं है।
कर्मों की गुह्य गति (II)
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कर्मों की गुह्य गति (II)
द्वापर शुरू होते ही हम देह अभिमान में आ जाते हैं .विकारों में आते चले जाने
से हमारी आत्मा कमज़ोर होती चली जाती है .यद्यपि धर्मात्मा...
लूः इस आग के दरिया से बचके
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क्या आप एक्सट्रीम गर्मियों के लिए तैयार हैं! कूलर-एसी ऑन हैं, रेफ्रिजरेटर
विभिन्न फ्लैवर के शर्बतों से अटा पड़ा है या फिर सप्ताहभर के लिए हिल-स्टेशन
जा रह...
खेलों में फ़िक्सिंग रोकने के सुगम उपाय
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पिछले हफ़्ते मीडिया पर आई.पी.एल. के फ़िक्सिंग की किरपा हुयी। घोटाले ने दर्शन
दिये। अफ़रा-तफ़री मच गयी। फ़िक्सिंग पर अंकुश लगाने के उपाय सोचे जाने लगे। गोया
फ़िक्...
हम दुबेजी बोल रहे हैं !
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"हैलो सर ! हम मेरु कैब से दुबेजी बोल रहे हैं" जिस सम्मान और गर्व के साथ
दुबेजी ने अपना नाम लिया मन किया कहूँ - "दुबे जी प्रणाम !"
नाटे कद के काली-सफ़ेद...
New Posts for May 21, 2013 and May 22, 2013
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*Computer Duniya*
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* ये तरीका अपनाए और अपनी जीमेल आईडी में स्पीड लाये * noreply@blogger.com
(Mayank Bhardwaj) Wed May...
जीवे जीवे पाकिस्तान...
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यूँ तो हर देशभक्त भारतीय पाकिस्तान के हर कदम का ठीक वैसा ही विरोध करेगा
जैसे भारतीय संसद में सरकारी पक्ष के किसी भी प्रस्ताव का...
जैसे वह मुझसे कुछ कहना चाहता है ...
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जबलपुर में दमोह रोड स्थित माढोताल तालाब है . दमोह रोड में मेरे चाचा जी का
मकान है और उनके मकान के ठीक पीछे माढोताल तालाब है . यहाँ मैं बचपन से जा
रहा हू...
गड्डी गुरू
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सवेरे गड्डी गुरू अक्सर मिल जाते हैं कछार में सवेरे सैर करते। बड़े ही यूनीक
व्यक्तित्व हैं। सैर करते हुये अक्सर ताली बजाते रहते हैं। इसमें उनका
व्यायाम भी ...
स्वयं से भागते, हम लोग
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कभी सोचा है कि व्यक्ति को सबसे अधिक भड़भड़ाहट कब होती है, सर्वाधिक मन कब
ऊबता है, कौन सा समय वह शीघ्रातिशीघ्र बिता देना चाहता है? उत्तर अधिक कठिन
नहीं हो...
गर्म हवायें..
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*( दादुशिन की चिरतकारी)* अबे, कितनी गरमी है, अच्छे आदमी, हैं? की आवाज़
लगाता, धम्म से चार सैकेंड के लिए घास पर निढाल गिरकर, और फिर उतनी ही प्रवीण
तत्पर...
जमाव रिश्तों का ...
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एक ज्योतिषी ने एक बार कहा था
उसे वह मिलेगा सब
जो भी वह चाहेगी दिल से
उसने मांगा
पिता की सेहत,
पति की तरक्की,
बेटे की नौकरी,
बेटी का ब्याह,
एक अदद छत.
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नवाचार या आविष्कार में क्यों पीछे है भारत
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विश्व मोहन तिवारी
उत्कृष्ट मानव वही है जो समस्याओं का हल निकाले।आज के विज्ञान युग के जीवन की
अधिकांश समस्याओं के हल निकालने में वैज्ञानिक शायद सर्वाधिक उप...
किताबों की दुनिया - 82
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कहती है ज़िन्दगी कि मुझे अम्न चाहिए
ओ' वक्त कह रहा है मुझे इन्कलाब दो
इस युग में दोस्ती की, मुहब्बत की आरज़ू
जैसे कोई बबूल से मांगे गुलाब दो
जो मानते ह...
यह उपासक कौन है
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संग्रहालय में घूमते समय एक शिल्प दिखा, शिव और पार्वती अगल बगल बैठे हुए
हैं और किसी साधू या ऋषि को उनके सामने उलटे पाँव हाथ के बल खडे दर्शाया गया
था. उप...
भ्रष्टाचार हमारे खून में -सतीश सक्सेना
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*आजकल भारतीयों में भ्रष्टाचार पर बोलने का शौक चर्राया हुआ है , कुछ वर्ष
पहले यह हवा में इतना नहीं फैला था, हां कुछ ईमानदार राजनीतिक पार्टियाँ, जो
बेचारी ब...
मैच फिक्सिंग: सरकार इस्तिफा दे!
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इतना बड़ा खुलासा. लाखों करोड़ों रुपयों का लेन देन और साथ में सेक्स स्कैंडल.
[image: protests]
श्री शांत के साथ साथ दो और खिलाड़ी. खिलाड़ियों समेत कई अन्यों ...
जन्नत कहीं है तो बस यहीं है , यहीं है -- मॉल कल्चर।
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कॉलेज के दिनों में अक्सर शाम को दोस्तों के साथ मार्किट की ओर निकल जाते थे ,
मटरगश्ती करने। खरीदारी करने की न कोई वज़ह या ज़रुरत होती थी , न हैसियत। जेब
मे...
साइंस ब्लॉगिंग की 03 कार्यशालाओं का आयोजन!
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विज्ञान संचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'तस्लीम' आगामी दिवसों में
राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद् (नेशनल काउंसिल फॉर साइंस
एण्ड टेक्नाल...
रिश्तों के अवशेष
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कभी कभी
या शायद बहुधा
रिश्ते जलाए प्रेम पत्रों के अवशेष से रह जाते हैं
काले सलेटी इन अवशेषों के शब्द
अब भी खुदे रह जाते हैं जस के तस
कुछ वैसे ही जैसे स्मृति...
जिजीविषा के आखिरी छोर पर
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काँच के प्याले में
आइस क्यूब्स के गिरने की आवाज़ आती है
जैसे तुम्हारा हेयर क्लिप
अंगुलियों से छिटक कर गिर पड़ता है आँगन पर।
और खुल जाता है, जूड़ा याद ...
Summer Vacation 2013,, Meghdoot Backyard,
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A short time out from daily chores and ofcourse from blogging too.Meeting
you all shortly. Bye!
नानापुराणनिगमागम सम्मतं यद रामायणे निगदितं क्वचिदनयतोअपि ....
लंपट (कहानी)
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बोस्टन से वाशिंगटन के बीच चलने वाली एसला एक्सप्रेस जब प्रोविडेन्स स्टेशन पर
रुकी तो निमेष की आँखें उन्हें कौतूहल से तलाश रही थीं। प्लैटफ़ॉर्म पर लगे
संकेतक...
शब्दों का साथ खोजते विचार
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कह पाना जितना सरल है भावों और विचारों को शब्दों के रूप ने लिख पाना उतना ही
कठिन । जाने कितनी ही बार यह आभास हुआ है कि विचारों का आवागमन जारी रहता है
पर ...
क्षणिकाएं !
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(१) *सुख और दुःख*
ऐसा वक्त कब आएगा
जब हम खुशी में
बचे रहेंगे सरल
और दर्द में अविकल
न खुशी में चहकेंगे और
न ही दुःख में होंगे विह्वल
क्या हमारे जीते ज...
सरबजीतों को यों मरने न दें
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सरबजीतों को यों मरने न दें - डॉ. वेद प्रताप वैदिक सरबजीत सिंह अगर भारतीय
जासूस होता या आतंकवादी होता तो क्या हमारी सरकार को पता नहीं होता? सरकार को
सरबजीत...
शादी में और क्या होना चाहिए?
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मौजूदा जरूरत की बीस फीसदी अदालतों में मुकदमे बहुत लंबे चलते हैं। इस बीच
मुवक्किल लगातार संपर्क में रहते हैं तो उन से मुहब्बत के रिश्ते कायम होना
स्वाभाव...
मेरी मां खटारा नहीं है आदि( लप्रेक)
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आदि, तू इतना अपसेट क्यों हो रहा है यार ? एक संडे हमलोग नहीं मिलते तो इससे
पहाड़ तो नहीं टूट जाता न और फिर आगे हम इतने संडे साथ होंगे कि तुझे याद भी
नहीं रह...
लघु रामकाव्य
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''रामकथा की ऐसी पाण्डुलिपि प्राप्त हुई है जिसमें 32 पंक्तियों में रामायण के
समस्त सर्गों को छंदबद्ध किया गया है। रामकथा पर उपलब्ध यह सबसे लघुकाय कृति
है। य...
बेल्जियम और होलेण्ड ट्रिप... भाग 1
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बहुत दिन हुए कहीं घूमने जाना नहीं हुआ था। पिछले साल जब स्कॉटलैंड गए थे तब
अपना वो अनुभव मैंने एक यात्रा वृतांत के रूप में आप सब के साथ बांटा था। तो
चलिये...
विचार-- --नियति (सूक्ति)
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अपने विचारों पर ध्यान दो, वे शब्द बन जाते हैं। अपने शब्दों पर ध्यान दो, वे
क्रिया बन जाते हैं। अपनी क्रियाओं पर ध्यान दो, वे आदत बन जाती हैं। अपनी
आदतों पर...
कागजों में बंद कुछ सालो का कोलहाहल -2
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130.....आत्मस्वीकृतियाभी एक प्रकार का तिलिस्म है.
131......लखनऊ से ट्रेन चली है ..अकेले यात्रा मुझे उबाऊ लगती है .अभय
इलाहाबाद चला गया . सेकत्रेट के ...
कसाब को फ़ांसी का बदला : सरबजीत का कत्ल
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उस दिन सुबह सुबह जब मुझे सफ़र के दौरान पाबला जी का मैसेज मिला शायद सुबह आठ
सवा आठ का कोई वक्त रहा होगा , मैं ट्रेन की खिडकी पर बैठा बैठा चौंक पडा था
और म...
बनारस और आसपास
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[image: 945490_10201053339883859_228042514_n]घंटेश्वर महादेव? वाराणसी से
मुगलसराय राह में।
[image: agyat]
अज्ञात हुतात्माओं के नाम - कोई तो है जिसने अ...
दैवीय आपदा.......
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देवताओं के दाढ़ी और मूँछें नहीं होती थीं ।
वे हमसे ताकतवर थे ।
उनको युद्ध में हराना मुश्किल था लेकिन असंभव नहीं । रावण के डर से वे थरथर
काँपते थे ।
... ...
श्रमकर पत्थर की शय्या पर
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श्रमकर पत्थर की शय्या पर
आज एक मई है। यानी कि मजदूर दिवस! इन श्रमकरों के श्रम के बिना हम जीवन में
कुछ नहीं हासिल कर सकते। उनका श्रम वंदनीय है। मुम्बई में ...
2014 Loksabha Elections - BJP Should Fight Alone
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*२०१४ में भाजपा को अकेले अपने दम पर ही चुनाव लड़ना चाहिए*
कहावत है कि “यदि किसी पार्टी में जनता का मूड भाँपने का गुर नहीं है और
निर्णयों को लेकर उसकी टाइमि...
फ़िल्मी प्रेम-प्रसंग में दिल ..
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तमाम चीजें समाज का दर्पण होती हैं। किस काल में कौन सी चीज समाज का दर्पण हो,
यह उस काल के समाज पर निर्भर करता है। प्राइमरी या मिडिल स्कूल के विद्यार्थी
के ल...
आँखों देखा हाल और हम हुए बेहाल ... जय हो सन्तों की
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संतों के संत ,भगवानों के भगवान , सदी के महानतम पुरुष का पंडाल सजा हुआ है!
संत शिरोमणि का प्रवचन शुरू हो चुका है! अहा ..क्या भक्ति की गंगा प्रवाहित हो
रही ह...
अधूरा ईश्वर..
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कहते हैं कि यह संसार/कायनात/सृष्टि/ब्रह्माण्ड ईश्वर की रचना है या फिर यह सब
कुछ ही ईश्वर है जिसे सूफ़ियों ने हमा ओस्त कहा है। इस बात में मुझे कुछ
दुविधा ...
चाय में चीनी जरा कम है, ये आज का पहला गम है
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चाय में चीनी जरा कम है, ये आज का पहला गम है। IPL में चौके हैं, छक्के हैंचीयरबालायें
बेदम हैं। चीन का तंबू तिब्बत में,उनके यहां जगह कम है। -कट्टा कानपुरीये
...
A Daughter remembers : ' Jyoti ~ Kalash '
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*ॐ *
*A Daughter remembers : **' Jyoti ~ Kalash '*
*
*
* Like a child that climbs out of the womb of Earth and
stands in awe witnessing ...
कल-कल की शब्दावली
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भा षा का विकास प्राकृतिक ध्वनियों का अनुकरण करने से हुआ है। पानी के बहाव
का संकेत *‘कल-कल’* ध्वनि से मिलता है। इस ‘कल’ के आधार पर देखते हैं कि हमारी
भाषाओ...
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शरयू फाल्के ने किया दादासाहब फाल्के को यादविश्वविद्यालय में पांच दिवसीय
फिल्म ऐप्रीसिएशन कोर्स का उदघाटन
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद...
बुद्धिवालों मुझे गरियाने मत लगना !
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आमतौर पर सामान्य बुद्धि वालों की तरह मैं भी बाबा विरोधी हूं। ज्यादातर
बाबाओं का जो, अंधविश्वास, अंधभक्ति फैलाकर लोगों को बरगलाते हैं और उनकी कमाई
से खुद दु...
"इतिहास-पुलाव" वाया फेसबुक :)
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कभी-कभी कोई फेसबुकिया स्टेटस पोस्ट लायक भी हो जाता है.....कुछ-कुछ
वैसा ही जैसे कोई पौधा इस उम्मीद में गमले में लगाया गया हो कि केवल पत्तेदार
हरिया...
उत्तर पूर्व की कविताएं - ८
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मुझे चाहिए
- ममांग दाई
(उत्तर पूर्व की कविताओं के क्रम में आज प्रस्तुत है अंग्रेजी में लिखने वाली अरुणाचली कवि ममांग दाई की एक और कविता। अनुवाद सिद्धेश्...
बाजार की भेंट चढे़ दो स्कूल
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जयप्रकाश शाला और कस्तूरबा कन्या शाला को अपनी जगह खाली करनी पड़ रही
है। जिस जगह दोनों स्कूल चल रहे थे वह बाजार के लिहाज से ज्यादा महत्वपूर्ण
है। वहां...
अपूर्णमिदं !
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पूजा की पोस्ट पढ़ते हुए ये लाइन मिली - *I am jigsaw puzzle of collective
memories, the key piece of which has been lost with mummy, forever. For all
they ...
पैनस्टार्स ने तो निराश किया अब इसान से ही आशा!
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आकाश में एक हप्ते से आँखें गड़ाए रखने के बावजूद भी जब पैनस्टार्स धूमकेतु नहीं
दिखा तो आज मैंने हार मान ही ली .वैसे दो एक दिन तो बादलों की धमाचौकड़ी ने खेल
...
गुलमर्ग: सपरिवार
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पिछली बार 28 जनवरी 2012 को गुलमर्ग गया था, इस बार भी तारीख वही थी, 28
जनवरी पर साल था 2013, एक और खास बात थी, और वह थी - परिवार का साथ होना!
...
परेशानियाँ अनेक इलाज एक
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एक ऐसा घरेलू चूर्ण है जिससे कई परेशानियों में राहत मिलती है. सर्दी,
जुकाम, खांसी, अजीर्ण,पेट दर्द, खट्टी डकार, गैस, जी घबराना इत्यादि में ये
चूर्ण तुरंत...
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अम्मां
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बहुत सालों पहले ,
अम्मा देखा करती थी,एक सपना ..
सपने में लहलहाती थी खुशियाँ,
जिसमे, एक ख़याल पनप कर
सरकारी बंगले से होता हुआ ..
'...
बड़की भौजी / कैलाश गौतम
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जनकवि कैलाश गौतम (1944 – 2006) विरल प्रजाति के गीतकार थे . लोकभाषा का अनुपम
छंद और लोकसंवेदना से गहरी संपृक्ति उनकी कविताओं और गीतों को विशिष्ट किस्म
के आत...
वृक्षों के लिए दिया बलिदान
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आपने आज तक कई आन्दोलनों के बारे में सुना होगा पर भारत में एक अनोखा आंदोलन
1730 में हुआ। उस आन्दोलन में पेड़ों को बचाने के लिए एक-दो नहीं नहीं बल्कि
363 म...
मेरा उपहार
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रात्रि बारह बजे से ही जन्मदिन के बधाइयाँ कोई सन्देश से तो कोई
कॉल करके दे रहा है | सबसे पहली शुभेच्छा उसकी ही थी जिसका पिछले छः सालों से
पहल...
मरदाना ताकतसे देश सेवा व तिवारी जी
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बहुत दिनों से ब्लॉग जगत से कटा रहा अघोषित संन्यास सा बना रहा कई ऐसे
विन्दुओ पर लिखने की इच्छा होने के बाद भी ऐसा लगा कि छोडिये और भी गम है
ज़माने में मोहब...
'गैंग्स ऑफ वासेपुर' के बारे में
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आज कुछ ऐसी परिस्थिति है कि हवाई जहाज लखनऊ से दिल्ली आकर रुका है और कुछ देर
में मुंबई उड़ान भरेगा। इसी बीच ख्याल आया कि काफी दिन हुए ब्लॉग पर कुछ लिखा
नहीं ...
बोलो तो मुसीबत, चुप रहो तो मुसीबत!!
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रवीन्द्र प्रभात एक सुलझे हुए चिट्ठाकार हैं जिनके आलेख मैं उनकी चिट्ठाकारी
के आरंभ से ही पढता आया हूँ. उनके कई आलेख बहुत ही विचारोत्तेजक रहे हैं एवं
उन आले...
फागुन आया
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इष्ट देव सांकृत्यायन
महक रहे हैं बौर
झूम रही अमवा की डारी
फागुन आया.
सांझ ढले सारे परहेजी
निकल गए भौंराबारी
कि फागुन आया.
अनमन हैं कुछ मोती बाबा
पलट र...
देखो ए दिवानों ऐसा काम न करो …
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अयोध्या में प्रस्तावित श्री राम जानकी मंदिर
देखो ए दिवानों ऐसा काम न करो … राम का नाम बदनाम न करो !!!
चुनाव का मौसम आ गया है । उत्तर प्रदेश में भाजपा ने अपन...
अदम जी मुझे लौकी नाथ कहते थे
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जयपुर में अदम जी मंच संचालन कर रहे थे। मुझे कविता पढ़ने बुलाने के पहले एक
किस्सा सुनाया। किसी नगर में एक बड़े ज्ञानी महात्मा थे। उनका एक शिष्य था नाम
था...
कहानी के इस भाग के प्रायोजक कौन है ?
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मैं कहानी में पूरी तरह से डूबा हुआ था.. या यू कह लीजिये कि मुझे तैरना आता
ही नहीं था.. एक छोटे से लकड़ी के तख्ते से लटका हुआ मैं आधा डूबा और आधा बचा
हुआ स...
इनफोसिस के मूर्ति दुखी हैं अंग्रेजी को दबाने से
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आज के जमाने में सारा खेल धंधे और स्वार्थों का है। किसी को देव मानकर चलना
खतरे से खाली नहीं। नहीं तो क्या तुक है कि इनफोसिस के जिस संस्थापक एन आर
नारायण मूर...
रुकी हुई रेल
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*हिलते पर्दे से छनकर रौशनी आती है , शीशे के बोल में अरालिया की एक लतर , किताबों
की टांड में एक ग्रॉसमन , रिल्के की ना समझी कोई कविता की एक अदद पंक्ति, चाय ...
कहते है हिन्दूस्तानी है हम....(सत्यम शिवम)
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कहते है हिन्दूस्तानी है हम,
पर जुबान पे अंग्रेजों की भाषा बसती है,
देख के अपनी विलायती तेवर,
हिन्दी हम पर यूँ हँसती है।
क्या बचपन में पहला अक्षर,
माँ कहने मे...
आज ब्लॉग विवरण में डॉ.कमला प्रसाद का नाम जोड़ा है
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आज बहुत भारी मन से मैंने ब्लॉग विवरण में दिवंगत आलोचकों की सूची में डॉ.कमला
प्रसाद का नाम जोड़ा है । और यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ उनपर लिखा एक लेख जो
विगत 1...
जग बौराना : तोते का गला कांग्रेस के पंजे में ।
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लेखक: श्री नरेश मिश्र साधो, कांग्रेस की बलिहारी । पहले जिस गर्भ को बड़े जतन
से पाला, पोसा, पुष्टाहार दिया उसे दो दिन में गिरा दिया । याद करो वे दिन जब
संसद ...
आत्मघात से बुरी कोई चीज़ नहीं
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—चौं रे चम्पू! पिछले दिनन में कौन सी खबर नै तेरौ ध्यान खैंचौ?
—चचा, ख़बरें तो हर दिन देश की, विदेश की, परियों की, परिवेश की और मुहब्बतों
के क्लेश की सामने आ...
दुनियादारी के दबाव में डगमगाता आत्मविश्वास
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मेरी बचपन की सहेली ने, अपनी एक विचित्र समस्या से निज़ात पाने के लिए मुझे फोन
किया और कहा,“ रचना! मेरे घर के सामने एक औरत आकर बस गयी है जो बहुत फूहड़ और
बदत...
काव्य संग्रह- केदार सम्मान के कवि
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हिंदुस्तानी एकेडेमी की अनुपम भेंट
*‘केदार शोध पीठ न्यास’* द्वारा प्रतिवर्ष समकालीन हिंदी कवियों में से ऐसे
कवि को चयनित कर केदार सम्मान प्रदान किया जाता ह...
अथ पीपली कथा
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आमिर खान सिनेमा जगत की एक बड़ी हस्ती हैं। अपनी दुनिया में लासानी। उनकी
पहचान कम, लेकिन सोच-समझकर फिल्में बनाने वाले किरदार के रूप में होती है।
संभवत: अभिन...
साधनाजी,उपासनाजी, उर्फ…
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बाबाओँ का हल्ला है। बल्कि दिल्ली के बाबा भीमानंद का विकट कालगर्ली रैकेट
देखकर यह नहीं समझ आ रहा है कि अब बाबाजी का कौन सा मुहल्ला है। सारे मुहल्ले
ही उनके ...
आयेंगे और रह जायेंगे
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दिन की रोशनी की आवाज़ कानों में उड़ेलते
चेहरे पर फैले पसीने की सनसनाहट का शोर मचाते
आते होंगे किसी पर्वत की गहराई से
निकलकर किसी आसमान की तराई से
न जाने क...
हे भगवान ! हमें मोटी होने का हक दो !
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प्रार्थना - हे भगवान हमें मोटी होने का हक दो ! हमें अपनी छाती और बाहों पर
बाल उगाने का हक और हिम्मत दो ! हमें देह को सजाने और न भी सजाने का फैसला
लेने की ब...
टीवी चैनल, सेंसर और रवि शंकर प्रसाद
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*पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने टीआरपी के धंधे पर यह भाषण सोमवार,
27 जुलाई 2009 को राज्यसभा में दिया। भाषण में टीआरपी की आड़ में देश के बड़े
हिस...
अधिकांश ट्रैवल साइटें चोरी की सामग्री से चल रही हैं
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कल हम लोगों नें बच्चों की गरमियों को दौरान कुछ पर्यटन स्थलों को भ्रमण के
लिये इंटरनेट पर विभन्न ट्रैवल साइटों से उन स्थानों के बारे में जानकारी लेने
की क...
टोस्ट विद टू होस्ट : एलो जी सनम हम आ गए..
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नमस्कार दोस्तों.. एक लम्बे इन्तेज़ार के बाद हम फिर हाज़िर है.. कॉफी के अरोमा
के साथ.. स्वागत है आपका कॉफी के सीजन टू 'टोस्ट विद टू होस्ट ' आज हमारे साथ
जो मे...
स्वात : किशोरी को सौ तालिबानी कोड़े
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17 वर्षीया किशोरी पर पड़ोसी ने अफेयर रखने का आरोप लगाया था.
व्यभिचारिणी एवं व्यभिचारी ----- इन दोनों में से प्रत्येक को सौ कोड़े मारो और
अल्लाह के धर्म (...