Tuesday, September 28, 2010

मेरी उलझन सुलझाइए… प्लीज़

 

justice आज मुझे बहुत बड़े कन्फ़्यूजन ने घेर रखा है। दोपहर बाद खबर आयी कि सर्वोच्च न्यायालय ने रमेश चन्द्र त्रिपाठी की याचिका खारिज कर दी है। अर्थात्‌ उन्होंने अयोध्या विवाद के फ़ैसले को स्थगित करने के जो-जो कारण गिनाए थे उनपर सभी पक्षों की राय जानने के बाद अदालत इस नतीजे पर पहुँची कि अब फैसला हो ही जाना चाहिए।

मैं ऑफिस से यह चिंता करता हुआ लौटा कि अब कांग्रेस पार्टी क्या बयान देगी। दर‍असल जिस दिन (२३ सितम्बर को) सर्वोच्च न्यायालय ने श्री त्रिपाठी की याचिका सुनवायी के लिए स्वीकार करते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया था और उच्च न्यायालय को तबतक फैसला स्थगित रखने का आदेश दिया था उस दिन कांग्रेस प्रवक्ता ने इसका जोरदार स्वागत किया था। यानि कांग्रेस खुश थी कि फैसला टल रहा है। अब आज याचिका खारिज होने के बाद क्या विकट स्थिति उत्पन्न हो गयी होगी। क्या आज बीजेपी वाले स्वागत करेंगे फैसले का?

घर पहुँचते ही मैने टीवी खोल दिया। सभी चैनेल अपने-अपने पैनेल के साथ चर्चा में लगे हुए थे। मुझे थोड़ा भी इंतज़ार नहीं करना पड़ा। कांग्रेस के प्रतिनिधि प्रायः सभी चैनेल्स पर मौजूद थे और आज के फैसले का भी ‘स्वागत’ कर रहे थे। बीजेपी तो स्वागत की मुद्रा में थी ही। पहली बार में तो मुझे अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ। लेकिन बार-बार सुनने पर मानना ही पड़ा कि वे इस निर्णय का स्वागत ही कर रहे हैं। अब मैं सकते में हूँ।

मेरे भोलेपन पर आप हँस सकते हैं। मैं इन नेताओं के बारे में इतना भी नहीं जानता। लानत है। कौन वाला स्वागत असली था और कौन वाला नकली? समझ नहीं पा रहा हूँ। आप मेरी उलझन सुलझाएंगे क्या?

शायद न्यायालय के फैसले का सम्मान करने की बात आज भी स्वागत योग्य है।

(सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी)

19 comments:

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI said...

आपकी उलझन को कोई नहीं नहीं सुलझा सकता ......हमारी तो औकात ही क्या ?

संगीता पुरी said...

भारत के नागरिक होते हुए एक उलझन में इतने परेशान हैं .. यहां तो चारो ओर उलझन ही उलझन है !!

गजेन्द्र सिंह said...

लेख अच्छा लिखा है ........

पढ़िए और मुस्कुराइए :-
जब रोहन पंहुचा संता के घर ...

अभिषेक ओझा said...

आपकी पोस्ट भी स्वागत योग्य है :)

राज भाटिय़ा said...

इस सवाल का जबाब तो यह नेता ही दे सकते है? या वो मुर्ख लोग जो इन की बातो मै आ कर आपस मै लडते है ओर देश को, हम सब को नुकसान पहुचाते है

देवेन्द्र पाण्डेय said...

नेतोओं ने एक बात मन में अच्छी तरह बिठा लिया है कि माननीय न्यायालय का जो भी फैसला आए उसका स्वागत करना है।
यहाँ ब्लॉग जगत में क्या कोई ऐसा नही है जो जो एक ही मत के पक्ष-विपक्ष वाले पोस्ट में जाकर NICE टीप कर आता हो! कभी देखा जैसा लगता है!

विवेक सिंह said...

क्या देश की सारी चिन्ताओं का ठेका त्रिपाठियों ने ही ले रखा है ?
और लोगों को भी मौका मिलना चाहिए ।

Arvind Mishra said...

भ्रम निवारण के लिए क्वाचिद्न्यतोपि पर पहुंचें ,..,.

सुलभ § Sulabh said...

Har baat स्वागत योग्य है...

Shiv said...

अरे भाई साहब दो पार्टियाँ स्वागत के मुद्दे पर एक हैं. इस बात का स्वागत हों चाहिए.

आपकी पोस्ट का स्वागत है:-)

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

लो, एक स्वागत हम भी ठेल दें। पता नहीं कल मारपीट की बात चलने लगे! :)

Meenu Khare said...

शुभकामनाओं के सिवा और क्या कहूं?

रंजना said...

भारतीय जनता तो कब से स्वागत को तैयार बैठी थी...
हार कर अब नेताजी भी तैयार हो गए हैं...

प्रवीण पाण्डेय said...

राजनैतिक पार्टियों के बयान में कितनी सत्यता रहती है और कितनी राजनीति, नहीं मालूम।

anshumala said...

ये खुद उलझे हुए है की कहे क्या हम तो यही कहेंगे की आपकी पोस्ट का स्वागत है |

cmpershad said...

THERE ARE MANY A SLIP BETWEEN THE CUP AND THE LIP.... तो इंतेज़ार कीजिए प्याले को होंटॊं तक आने का :)

ajit gupta said...

हमें तो विवेक सिंह जी की बात मजेदार लगी। नाई-नाई बाल कितने जजमान सामने ही हैं। कल देखिए क्‍या होता है।

Harshkant tripathi"Pawan" said...

लो आप भी उलझन में पड़ गये? मेरे कुछ ऐसे ही प्रश्नों को सुलझाते हुए आपने मेरे ब्लॉग पे अबतक का सबसे बड़ा कमेन्ट कर डाला था. पढ़ कर मै काफी हद तक संतुष्ट भी हुआ था. मै तो यह उलझन दूर करने से रहा, उल्टे एक बार फिर से उलझन में पड़ गया हूँ. उलझन सुलझ जाय तो मुझे भी बताइयेगा. वैसे ये कल के बाद कुछ और बढती हुई नजर आ रही है???????

प्रवीण शाह said...

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आपकी 'उलझन' का भी...स्वागत है.... :)


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